नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की खास बातें – National Education Policy 2020

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020

शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन के लिए केंद्र सरकार द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को मंजूरी दे दी गयी है। शिक्षा नीति में ये बदलाव 35 साल बाद होने जा रहा है। इसके पहले 1986 में इसे बदला गया था। इस शिक्षा नीति के द्वारा पूरी शिक्षा प्रणाली को लचीला बनाया जायेगा।

इसको 21 वीं सदी के हिसाब से तैयार किया गया है। इसमें छात्रों के ज्ञान, विज्ञान, शोध और पेशेवर शिक्षा पर जोर दिया जायेगा ताकि छात्र कॉलेज से निकलकर अपने ज्ञान और स्किल के आधार पर नौकरी पा सके।

इस नीति के द्वारा छात्रों को रटने वाला ज्ञान ना देकर उन्हें ज्ञान-विज्ञान के साथ-साथ बुद्धि कौशल का ज्ञान देने की योजना है। इसके लिए छात्रों को अपनी मर्ज़ी के विषय चुनने का विकल्प होगा जिसमें वो रूचि रखते हैं जिससे उनका उस विषय को पढ़ने में मन लगेगा।

जो छात्र शोध और अनुसन्धान में रूचि रखते हैं उनके लिए भी अब शोध करना आसान होगा। शोध करने के इच्छुक छात्र 3 की बजाय 4 साल का डिग्री कोर्स कर सकेंगे। सरकार द्वारा 15 साल में उच्च शिक्षा में एडमिशन लेने वाले छात्रों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की खास बातें

> 10+2 फॉर्मूला की जगह अब 5+3+3+4 के फॉर्मले को लागू किया जायेगा।

> पहले 5 साल फाउंडेशन स्टेज में 3 साल आँगनबाड़ी या प्री-स्कूल और 2 साल प्रथम और द्वितीय कक्षा की पढाई होगी।

> इसके बाद प्रारंभिक स्तर पर 3 साल तीसरी कक्षा से 5वीं कक्षा तक पढाई होगी।

> फिर माध्यमिक स्तर पर अगले 3 साल 6वीं से 8वीं कक्षा तक पढाई का अगला स्तर होगा।

> सेकेंडरी स्तर पर अन्तिम 4 साल 9वीं से 12वीं तक की पढाई होगी।

> इस शिक्षा नीति को 2021-22 से लागू किया जायेगा।

> नयी शिक्षा नीति में शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी का 6% खर्च किया जायेगा। फिलहाल ये खर्च जीडीपी का 4.43% है।

> तकनीकि संस्थानों में आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज के विषय भी पढ़ाये जायेंगे।

> HRD (ह्यूमन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट) मिनिस्ट्री का नाम बदलकर  मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन किया जायेगा।

> एक कॉमन एंट्रेंस एग्जाम के द्वारा देश के सभी शिक्षण संस्थानों में एडमिशन लिया जा सकेगा। इस एग्जाम को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) करवायेगी।

> विद्यार्थियों को क्षेत्रीय भाषाओं में ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध कराये जायेंगे।

> अब छात्र अपनी मर्जी से किसी भी विषय को चुन सकेगा मतलब अब छात्र गणित के साथ ही कला को भी अपने विषय के रूप में चुन सकेगा। पहले छात्र के पास कला, विज्ञान और कॉमर्स ये तीन ही विकल्प थे।

> स्कूल में पांचवीं कक्षा तक स्थानीय भाषा में पढाई करने की स्वतंत्रता होगी। छात्रों पर कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी।

> छात्रों को दो बार बोर्ड परीक्षा देने का मौका मिलेगा।

> कक्षा 6 से छात्रों को कोडिंग सिखाई जाएगी।

> मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम को लागू किया जायेगा। इसके तहत अगर कोई किसी कारणवश पढाई बीच में छोड़ देता है तो उसे एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा, तीन-चार साल बाद डिग्री मिल जाएगी।

> अगर छात्र छूटी हुई पढाई को पूरी करना चाहता है तो जहाँ से उसने छोड़ा है वहीं से शुरू कर सकता है।

> डिग्री कोर्स दो तरह के होंगे एक जिन्हें नौकरी करना है वो 3 साल का डिग्री कोर्स कर सकते हैं और दूसरा जो शोध के क्षेत्र में रूचि रखते हैं वो 4 साल का डिग्री कोर्स कर सकते हैं।

> शोध और अनुसन्धान के इच्छुक छात्र 4 साल का बीए कोर्स करने के बाद 1 साल का एमए और फिर सीधे पीएचडी कर सकेंगे।

> छात्रों को स्कूल के हर स्तर पर और उच्च शिक्षा में भी संस्कृत विषय को चुनने का विकल्प होगा।

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