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ट्रैवेल एजेंसी कैसे शुरू करें How to Start A Travel Agency Business in India

शायद ही कोई होगा जिसे नयी-नयी जगह घूमना पसंद ना हो। हम में से सभी कहीं ना कहीं घूमने जरूर गए होंगे या अक्सर जाते रहते होंगे। जब भी हम किसी नयी जगह घूमने जाते हैं तो हमें उस जगह के बारे में नहीं पता होता है। ऐसे में हम ट्रैवेल एजेंसी (Travel Agency) में जाते हैं। ट्रैवेल एजेंसी हमें यात्रा से सम्बंधित परामर्श सेवाएं (consultation services) उपलब्ध कराती है।

ट्रैवेल एजेंट (Travel Agent) हमारे टूर से सम्बंधित सभी जरुरी चीज़ों जैसे यात्रा टिकट, रुकने के लिए होटल, कार रेंटल आदि को हमारे बजट के अनुसार हमें उपलब्ध कराते हैं। ट्रैवेल एजेंट हमें यात्रा से सम्बंधित सभी जरुरी जानकारी जैसे मौसम की जानकारी, सावधानी की बातें, वहां के नियम-कानून, वहां के मौजूदा हालात, आवश्यक दस्तावेज आदि उपलब्ध कराते हैं। ट्रैवेल एजेंट यह सुनिश्चित करता है कि हमारी यात्रा सुखद और सुरक्षित हो।

ट्रैवेल एजेंसी (Travel Agency) हमें यात्रा से सम्बंधित परामर्श देने का काम करती है। ट्रैवेल एजेंसी में काम करने वाले व्यक्ति को ट्रैवेल एजेंट (Travel Agent) कहा जाता है।

ट्रैवल एजेंट एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसे पर्यटक उत्पाद – गंतव्य स्थानों, यात्रा के तरीके, जलवायु, आवास और सेवा क्षेत्र के अन्य क्षेत्रों के बारे में पूरी जानकारी होती है। वह उत्पाद प्रदाताओं / सिद्धांतों की ओर से कार्य करता है और बदले में एक कमीशन प्राप्त करता है। तकनीकी रूप से, एक ट्रैवल एजेंट एक एजेंसी का मालिक या प्रबंधक होता है, लेकिन अन्य कर्मचारी पर्यटकों को सलाह देने और पैकेज टूर / ट्रैवल उत्पादों के व्यक्तिगत घटकों को बेचने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

एक ट्रैवल एजेंट एक व्यक्ति / फर्म या निगम हो सकता है जिसे आमतौर पर एक ट्रैवल एजेंसी के रूप में जाना जाता है। ट्रैवेल एजेंसी का अर्थ है ट्रैवल एजेंट या संगठन का कार्यालय जहां सभी ट्रैवल सामान और सेवाओं को इकट्ठा किया जाता है और ट्रैवल एजेंसी के कारोबार के सुचारू संचालन के लिए समन्वित किया जाता है।

ट्रैवेल एजेंसी के प्रकार (Types of Travel Agency)

ट्रैवेल एजेंसी 2 प्रकार की होती है:-

1. रिटेल ट्रैवेल एजेंसी (Retail Travel Agency)

एक रिटेल ट्रैवल एजेंसी पर्यटकों को सीधे उत्पाद आपूर्तिकर्ताओं (products suppliers) की ओर से पर्यटकों के उत्पादों (tourists products) को बेचती है और बदले में कमीशन मिलता है। कुछ पैकेज टूर को दो तरीकों से बेचा जाता है, अर्थात् कमीशन के आधार पर और मूल्य को चिह्नित करके।

जब कोई ट्रैवल एजेंसी चिह्नित मूल्य पर एक टूर बेचती है तो इसका मतलब है कि पहले, यह टूर की लागत को चिह्नित करता है और फिर इसे उच्च दर पर बेचता है। मार्कअप मूल्य खुदरा मूल्य (Retail Price) और थोक लागत (wholesale cost) के बीच का अंतर है।

एक ट्रैवल एजेंसी अपने राजस्व का लगभग 95% कमीशन से, और शेष 5% परामर्श सेवाओं और अन्य से प्राप्त करती है।

2. होलसेल ट्रैवेल एजेंसी (Wholesale Travel Agency)

इन एजेंसियों को पैकेज टूर के आयोजन में विशेषज्ञता प्राप्त होती है, जो ग्राहकों / पर्यटकों को एक खुदरा ट्रैवल एजेंसी के नेटवर्क के माध्यम से या सीधे भावी ग्राहकों (यदि थोक ट्रैवल एजेंसी का रिटेल डिवीजन है) को बेचती है। एक थोक ट्रैवल एजेंसी पर्यटकों के उत्पाद घटकों को थोक में खरीदती है और टूर पैकेज को डिज़ाइन करती है।

कभी-कभी, एक थोक ट्रैवल एजेंसी थोक में विक्रेता से यात्रा घटकों को खरीदती है और उन्हें अन्य ट्रैवेल एजेंसियों को बेच देती है।

थोक ट्रैवल एजेंसियां ​​हॉलिडे पैकेज (Holiday Package) को इकट्ठा करती हैं और खुदरा ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से ग्राहकों को बेचती हैं। एक विशिष्ट पैकेज टूर में हवाई टिकट, आवास, और कुछ अन्य सेवाएं भी इसमें शामिल हो सकती हैं जैसे कि मनोरंजन, दर्शनीय स्थल और खेल गतिविधियाँ आदि।

ट्रैवेल एजेंसी की सेवाएं (Services of Travel Agency)

आज, ट्रैवल एजेंसियों को यात्रा और पर्यटन के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में मान्यता दी गई है और वैश्विक स्तर पर यात्रा और पर्यटन उद्योग का एक अभिन्न अंग बन गयीं है। वे 90% से अधिक अंतरराष्ट्रीय और 70% घरेलू पर्यटक यातायात के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, सभी ट्रैवल एजेंसी के राजस्व का 60% से अधिक व्यापार यात्रा (business travel) से प्राप्त होता है।

एक बड़ी ट्रैवेल एजेंसी कौन-कौन से कार्य करती है और क्या-क्या सेवाएं उपलब्ध कराती है? आइये जानते हैं:-

1. यात्रा की जानकारी

एक ट्रैवल एजेंसी का आकार जो भी हो, उसे पर्यटकों को आवश्यक यात्रा जानकारी प्रदान करना होता है। एक ट्रैवल एजेंसी को गंतव्य स्थान, यात्रा, आवास, दर्शनीय-स्थलों, खरीदारी, आव्रजन (immigration), पासपोर्ट, वीजा, सीमा शुल्क निकासी और प्रक्रिया, स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों के बारे में अप-टू-डेट, सटीक और समय पर जानकारी देनी होती है और विशेष क्षेत्रों में यात्रा के लिए आवश्यक विभिन्न परमिट आदि के बारे में जानकारी देनी होती है।

2. यात्रा कार्यक्रम तैयार करना

पर्यटक यात्रा कार्यक्रम शब्द का उपयोग किसी यात्री की यात्रा के मूल, गंतव्य और सभी रुकने वाले बिंदुओं की पहचान करने के लिए किया जाता है। यह विभिन्न तत्वों की संरचना है और बाजार के विस्तृत अध्ययन के बाद डिज़ाइन किया जाता है। ट्रैवल एजेंसियां ​​टूर पैकेज के लिए एक यात्रा कार्यक्रम तैयार करती हैं।

3. एयरलाइन टिकट और आरक्षण

एक ट्रैवल एजेंसी विभिन्न प्रकार के पर्यटन उत्पादों को बेचती है। एयरलाइन टिकटिंग और आरक्षण अभी भी राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। ट्रैवल एजेंसियां ​​विभिन्न एयरलाइनों की ओर से एयरलाइन टिकटिंग और आरक्षण का कार्य करती हैं।

4. टूर पैकेजिंग और लागत निर्धारण

ट्रैवल एजेंसियां ​​टूर पैकेज तैयार करती हैं और उन्हें पर्यटकों को बेचती हैं। टूर पैकेजों की कोस्टिंग और मूल्य निर्धारण ट्रैवल एजेंट की क्षमता पर काफी हद तक निर्भर करता है कि वह प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के साथ बातचीत करने में कितना प्रभावी है।

5. यात्रा बीमा

कुछ बड़े पैमाने पर यात्रा एजेंसियां ​​अपने ग्राहकों की सेवा के लिए अतिरिक्त कार्य करती हैं। ट्रैवल इंश्योरेंस ट्रैवल संबंधित घटनाओं और समस्याओं की एक विस्तृत श्रृंखला के परिणामस्वरूप व्यक्तिगत और साथ ही सामान के नुकसान से यात्रियों की रक्षा करता है

6. मुद्रा सेवाएं

सरकार द्वारा अधिकृत ट्रैवल एजेंसी पर्यटकों को मुद्रा विनिमय सेवाएं भी प्रदान करती हैं।

ट्रैवेल एजेंसी बिज़नेस में स्कोप / Scope in Travel Agency Business

ट्रैवेल एजेंसी बिज़नेस एक ऐसा बिज़नेस है जिसकी डिमांड लगातार बढ़ रही है। लोग दुनिया देखना चाहते हैं। नयी-नयी जगह पर जाना चाहते हैं। लोग समय के अभाव में यात्रा से सम्बंधित जानकारी नहीं जुटा पाते। इसके लिए वो ट्रैवेल एजेंट के पास जाते हैं और ट्रैवेल एजेंट उन्हें अपनी सर्विस देकर उनका समय बचाते हैं और लोग टेंशन फ्री होकर यात्रा का मजा ले पाते हैं।

> यात्रा और पर्यटन भारत के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है, 2018 में देश के सकल घरेलू उत्पाद में 247 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का योगदान है। यह 2029 तक 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। बीमार अर्थव्यवस्था के बावजूद, पर्यटन उद्योग ने धीमा होने के कोई संकेत नहीं दिखाए हैं, और इसके बजाय देश के लिए विदेशी मुद्रा के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में विकसित हुआ है। और जमीन पर लोगों के लिए, यह भारत में रोजगार पैदा करता रहा है, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से रोजगार प्रदान कर रहा है।

> यह स्पष्ट रूप से दिखता है, जब कोई घरेलू पर्यटकों की संख्या को देखता है। अकेले 2018 में, सभी भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1,854 मिलियन से अधिक घरेलू पर्यटक यात्राएं की गईं, जिसके परिणामस्वरूप एक दशक में घरेलू पर्यटन का सबसे अधिक प्रवाह हुआ।

> भारत में 125 से अधिक कार्यात्मक हवाई अड्डे हैं, और कई कम लागत वाली एयरलाइन ऑपरेटरों ने घरेलू विमानन उद्योग पर अपना वर्चस्व कायम किया है।भारत के 2024 तक चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनने की उम्मीद है।

> यहां तक ​​कि भारत में आतिथ्य उद्योग ने हाल के वर्षों में मजबूत और लगातार वृद्धि देखी है। 2016 में, होटलों की औसत दैनिक दर एक दशक में सबसे कम 85 अमेरिकी डॉलर थी।

> गिरती औसत दैनिक दर के बावजूद, भारत में होटल उद्योग की अधिभोग (occupancy) दर पिछले कुछ वर्षों में लगभग 60 प्रतिशत सालाना पर स्थिर रही है।

> होमस्टे, हॉस्टल, सर्विस्ड अपार्टमेंट, एयरबीएनबी और ओयो रूम्स जैसे गैर-पारंपरिक आवास के आगमन के साथ, पारंपरिक होटल के कमरे के अधिभोग से निर्भरता में बदलाव आया है। इसके अलावा, भारत में यात्रा और पर्यटन उद्योग यात्रियों के लिए ढांचागत प्रावधानों, कनेक्टिविटी और सुरक्षा के मामले में विकास की एक नई लहर देख रहा है।

लागत कितनी होगी / Cost to Setup a Travel Agency Business

ट्रैवेल एजेंसी बिज़नेस की लागत इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस प्रकार की एजेंसी खोलना चाहते हैं ऑनलाइन या ऑफलाइन

एक ट्रैवेल एजेंसी बिज़नेस खोलने के लिए हमें किन-किन चीज़ों की आवश्यकता होगी? आइये जानते हैं:-

> ऑनलाइन ट्रैवेल एजेंसी खोलने के लिए आपको एक कंप्यूटर, इंटरनेट, एक वेबसाइट और टिकट बुकिंग एजेंसी की फ्रैंचाइज़ी की आवश्यकता पड़ेगी।

> ऑफलाइन ट्रैवेल एजेंसी खोलने के लिए आपको निम्न चीज़ों की आवश्यकता होगी:-

फ्रैंचाइज़ी:- सबसे पहले आपको एक ट्रैवेल टिकट बुक करने वाली किसी अच्छी कंपनी से फ्रैंचाइज़ी लेनी होगी। इसके लिए आप मार्केट में पता करें फिर किसी नतीजे पर पहुंचे। आप कंपनी के ऑफिस जाकर पूरी जानकारी अवश्य लें।

ऑफिस:- इसके लिए आपको एक ऑफिस किराये पर लेना होगा। ऑफिस का किराया आपकी लोकेशन पर निर्भर करता है। आप अपने बजट के अनुसार इसका चुनाव करें। ऑफिस की जगह पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था हो इस बात का ध्यान रखें।

स्टाफ:- आपको इसके लिए कुछ लोगों को रखना पड़ सकता है। स्टाफ का चयन सोच-समझकर करें। अनुभवी लोगों को प्राथमिकता दें। और सैलरी तय करने से पहले मार्केट में जाकर जाँच पड़ताल अवश्य कर लें।

अन्य आवश्यकताएं:- अन्य आवश्यकताओं में कंप्यूटर, प्रिंटर, इन्वर्टर, फर्नीचर आदि की जरुरत पड़ेगी।

बिज़नेस का पंजीकरण / Business License

ट्रैवेल एजेंसी बिज़नेस शुरू करने के लिए आपको इन लाइसेंस को लेना आवश्यक है:-

कंपनी पंजीकरण:- सबसे पहले आपको अपनी कंपनी को प्रोपराइटरशिप/पार्टनरशिप/प्राइवेट लिमिटेड के रूप में पंजीकृत करना करना होगा। इसके लिए आपको अपने नगर-पालिका/नगर-निगम के दफ्तर में जाकर आवेदन करना होगा।

GST रजिस्ट्रेशन:- इस बिज़नेस के लिए आपको GST रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। यह आवश्यक है कि आप माल और सेवा कर के तहत पंजीकरण करें। इससे आपको एक जीएसटी नंबर और प्रमाण पत्र मिलेगा जो आप अपने व्यापार लेनदेन के लिए उपयोग कर रहे होंगे।

बिज़नेस की लोकेशन:- आपको एक कार्यालय की आवश्यकता होगी जिसे आप कंपनी में पंजीकृत करेंगे जिसे आप बनाते हैं और यदि आप अपना व्यवसाय ऑनलाइन शुरू करने के लिए उत्सुक हैं तो आपको डीबीए (डूइंग बिजनेस अस) प्राप्त करना होगा।

मुनाफा कितना होगा / How much will be the profit margin

इस बिज़नेस में मुनाफा निम्न बातों पर निर्भर करता है:-

> आप कितना टूर पैकेज बेच पाते हैं। आप अपनी सेल्स बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले सकते हैं। अपने बिज़नेस को गूगल मैप में रजिस्टर कर सकते हैं। अखबार में विज्ञापन दे सकते हैं।

> प्रॉफिट मार्जिन कितना प्रतिशत है। आमतौर पर ये 5–8% होता है।

> कस्टमर के साथ रिलेशन कैसा है। अगर आपका अपने कस्टमर के साथ अच्छा रिलेशन होगा तो वो बार-बार आपकी एजेंसी में आएगा और आपकी सेल्स बढ़ेगी जिससे आपका प्रॉफिट बढ़ेगा। आपको कस्टमर को बेहतर सर्विस देनी होगी और उसका ध्यान भी रखना होगा। कस्टमर से लॉयल होना होगा। कस्टमर से लॉयल्टी बढ़ाने के लिए आप उसे जन्मदिन, नये वर्ष, शादी की सालगिरह और त्यौहार आदि मौके पर बधाई सन्देश भेज सकते हैं।

> हो सके तो कस्टमर को मैसेज करके उसकी पिछली ट्रिप के बारे में ध्यान दिला सकते हैं। अगर आप ऐसी ही छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो आप एक अच्छा कस्टमर बेस बना पाएंगे।

निष्कर्ष / conclusion

जैसा कि मैंने आपको बताया कि ट्रैवेल एंड टूरिज्म इंडस्ट्री में अपार संभावनाएं हैं। भारत में ये इंडस्ट्री बहुत बड़ी है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि अगर आप इस बिज़नेस को शुरू करते हैं तो आप इससे अच्छा खासा पैसा कमा सकते हैं। हालाँकि, आपको शुरू में काफी मेहनत करनी पड़ेगी। आपको अपना कस्टमर बेस बनाना होगा और बेहतर सर्विस उपलब्ध करानी होगी। आप कस्टमर का जितना ध्यान रखोगे, कस्टमर भी आपका उतना ही ध्यान रखेगा। वो बार-बार आपके पास ही आएगा। अगर आप इन सब बातों का ध्यान रखेंगे तो निश्चित रूप से आप इस बिज़नेस में सफल होंगे और अच्छा पैसा भी कमाएंगे।

आइये भारत को आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान दें

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