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15 अगस्त क्यों मनाया जाता है? – 15 August Swatantrata Diwas kyu manaya jata hai?

हर भारतीय को ये जानना जरुरी है कि 15 अगस्त क्यों मनाया जाता है? / 15 August Swatantrata Diwas kyu manaya jata hai?

इस बार 15 अगस्त, 2020 को भारत का 74 वाँ स्वतंत्रता दिवस (74th Independence Day of India) मनाया जायेगा। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 वीं बार लाल किले से ध्वजारोहण (Flag Hoisting) करेंगे।

इस बार का स्वतंत्रता दिवस बहुत खास है क्योंकि लगभग 500 सालों के इंतज़ार के बाद आपसी सौहार्द के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जन्मभूमि पर मंदिर बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 5 अगस्त, 2020 को भूमिपूजन किया गया और मंदिर की आधारशिला राखी गयी।

आज हम स्वतंत्र हैं, हमारे पास अधिकार हैं, हम अपनी बात को आसानी से सरकार तक पहुंचा सकते हैं, अपना विरोध प्रकट कर सकते हैं और अपनी मर्जी का काम कर सकते हैं बशर्ते वो काम क़ानूनी तौर पर सही हो। इसलिए हो सकता है कि हम उस बात का अंदाजा ना लगा पाएं कि गुलामी क्या होती है।

भारत का गुलामी का इतिहास बहुत लम्बा है। अंग्रेजों ने भारत पर 200 सालों तक राज किया और यहाँ के धन और संपत्ति को लूटा। अंग्रेजों से पहले भारत मुग़लों का गुलाम था। भारत में समय-समय पर महान देशभक्त हुए जिन्होंने अपने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

भारत को स्वतंत्रता कैसे मिली? (How India Get Freedom)

हम जानते हैं कि भारत पर कई विदेशी आक्रमणकारियों ने हमला किया और यहाँ राज किया इनमें अरबी, अफगानी, मंगोल, तुर्की, पुर्तगाली और अंग्रेज आदि प्रमुख हैं। भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों को यहाँ से भगाया था और देश को आजाद कराया था। इसलिए हमें ये जानना जरुरी है कि अंग्रेज भारत में कैसे आये और यहाँ कैसे कब्ज़ा किया? तो आइये जानते हैं:-

अंग्रेजों का भारत में आगमन

भारत में सबसे पहले 1609 ई. में कैप्टन हॉकिन्स जेम्स प्रथम का राजदूत बनकर व्यापार के उद्देश्य से मुग़ल बादशाह जहांगीर के शासन काल में आया था। इसके बाद 1615 ई. में सर टॉमस रो को जेम्स प्रथम जहांगीर के दरबार में भेजता है। जहांगीर के द्वारा शाही फरमान जारी होने पर अंग्रेजों को सूरत में सर थॉमस एल्डवर्थ के अधीन व्यापारिक कोठी/कारखाना खोलने की इजाजत दे दी जाती है।

इसके बाद अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में अन्य जगह जैसे मद्रास, बॉम्बे और कलकत्ता में अपना कारखाना खोलने की इजाजत मिल गयी। अंग्रेजों ने धीरे-धीरे अपने व्यापार को बढ़ाया और अन्य कंपनियों को अपनी कूटनीति से भारत से बाहर खदेड़ दिया और अपना वर्चस्व कायम किया।

अंग्रेजों का भारत पर कब्ज़ा

23 जून, 1757 को प्लासी का युद्ध हुआ था जो बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और अंग्रेजों के सेनापति रॉबर्ट क्लाइव के बीच हुआ था। इस युद्ध में सिराजुद्दौला का सेनापति मीर जाफर धोखा देकर अंग्रेजों के साथ मिल जाता है जिससे इस युद्ध में बंगाल के नवाब की हार हो जाती है।

इसके बाद अंग्रेज मीर जाफर को बंगाल का नवाब बना देते हैं। लेकिन बाद में उसे हटाकर उसके दामाद मीर कासिम को बंगाल का नवाब बना दिया जाता है।

मीर कासिम अंग्रेजों से पीछा छुड़ाने के लिए अवध के नवाब सुजाउद्दौला और मुग़ल सम्राट शाह आलम द्वितीय के साथ मिल जाता है। 22 अक्टूबर 1764 ई. में अंग्रेजों और मीर कासिम, सुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय के बीच एक युद्ध होता है जिसे बक्सर का युद्ध के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में भी अंग्रेजों की जीत होती है।

ईस्ट इंडिया कंपनी का बंगाल पर अधिकार होने पर वारेन हेस्टिंग्स को कंपनी के अधीन बंगाल का प्रथम गवर्नर-जनरल बना दिया जाता है।

इसके बाद अंग्रेज संधि करके भारत के राज्यों को मिलाते गए और अपनी सत्ता का विस्तार करते गए। कुछ राज्य अंग्रेजों ने संधि करके मिलाये तो कुछ उन्होंने जबरदस्ती हड़प लिए।

अंग्रेज फूट डालो और राज करो की नीति पर काम करते थे। वो भारत के अलग-अलग राज्यों में फूट डालकर उनसे संधि करके अपने में मिला लेते थे।

1833 में अंग्रेजों द्वारा लाये गए चार्टर एक्ट के द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया गया। भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक को बनाया गया था।

भारत का प्रथम स्वाधीनता संग्राम- 1857 की क्रांति

1857 ki Kranti
Jhansi ki rani Lakshmibai

भारत में स्वतंत्रता के लिए प्रथम स्वाधीनता संग्राम की शुरुआत 10 मई, 1857 को हुई थी इसलिए इसे 1857 की क्रांति भी कहते हैं।

1856 में अंग्रेजों ने पुरानी बन्दूक ब्राउन बैस के स्थान पर नयी एनफील्ड राइफल को प्रयोग करने का निर्णय लिया इसके कारतूस को बनाने में गाय और सूअर की चर्बी का प्रयोग होता था। इन कारतूसों का प्रयोग करने के लिए इन्हें मुंह से खोलना पड़ता था।

इस बात का पता बैरकपुर के एक सैनिक मंगल पांडे को लग गया जिससे उसने कारतूसों को मुंह से काटने से माना कर दिया। जिसके फलस्वरूप मंगल पांडे को 8 अप्रैल, 1857 को फांसी दे दी गयी।

इसके बाद 10 मई, 1857 को मेरठ की पैदल सेना के द्वारा 1857 की क्रांति की शुरुआत की गयी। इस क्रांति के प्रमुख केंद्र दिल्ली, कानपुर, झाँसी, लखनऊ, इलाहाबाद, बरेली, फैजापुर, फतेहपुर, और जगदीशपुर थे। यह क्रांति असफल रही थी।

1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों द्वारा भारत शासन अधिनियम- 1858 पारित किया गया जिसके द्वारा मुग़ल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया और भारत के गवर्नर-जनरल पद को हटाकर शासन को कंपनी के हाथों से हटाकर ब्रिटिश सरकार ने सीधे अपने नियंत्रण में ले लिया। ब्रिटिश सरकार ने सम्राट के अधीन भारत का वायसराय नियुक्त कर दिया।

भारत का प्रथम वायसराय तथा कंपनी द्वारा नियुक्त अंतिम गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग था।

यह भी पढ़ें:- 15 अगस्त पर निबंध

भारत के स्वतंत्रता-संघर्ष की शुरुआत

1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों का विरोध भारत में जगह-जगह शुरू हो गया। सबसे पहले अंग्रेज विरोधी संघर्ष सन्यासियों द्वारा शुरू किया गया इस बात का उल्लेख बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनन्दमठ‘ में किया गया है।

28 दिसंबर, 1885 ई. को बम्बई में ए. ओ. ह्यूम के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) की स्थापना हुई। इसने भारत की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वदेशी आंदोलन:- 20 जुलाई, 1905 को लॉर्ड कर्जन बंगाल-विभाजन का निर्णय लेने की घोषणा करता है। इसके विरोध में 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की घोषणा की गयी। विरोध के बावजूद 16 अक्टूबर, 1905 को बंगाल का विभाजन कर दिया जाता है। इस दिन पूरे बंगाल में शोक दिवस मनाया गया।

स्वदेशी आंदोलन के अवसर पर ही रवींद्र नाथ टैगोर ने प्रसिद्ध गीत ‘आमार सोनार बांग्ला‘ लिखा जो बाद में बांग्लादेश का राष्ट्रीय गीत बना।

1906 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार दादा भाई नैरोजी द्वारा स्वराज्य की मांग प्रस्तुत की गयी।

चम्पारण आंदोलन:- बिहार के एक किसान नेता राजकुमार शुक्ल ने गाँधी जी को चम्पारण, बिहार में जाने के लिए प्रेरित किया। वहां किसान अंग्रेजों द्वारा करवाई जा रही नील की खेती का विरोध कर रहे थे। अंग्रेज नील की खेती करवा कर मुश्किल से उसका भुगतान कर रहे थे।

Mahatma Gandhi

इसके विरोध में 1917 में गाँधी जी ने चम्पारण आंदोलन की शुरुआत की। यह गाँधी जी का पहला सत्याग्रह आंदोलन था। इसके बाद अंग्रेजों को अपनी इस तिनकठिया पद्धति को समाप्त करना पड़ा। यह आंदोलन भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक तौर पर एक महत्वपूर्ण विद्रोह था। यहाँ से भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा मिली।

असहयोग आंदोलन:- रौलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में गाँधी जी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में 1 अगस्त, 1920 ई. को असहयोग आंदोलन की शुरुआत हुई। यह आंदोलन सफल रहा था क्योंकि इसे लाखों लोगों का समर्थन मिला था।

19 मार्च, 1919 को रौलेट एक्ट लागू किया गया था। इसके अनुसार किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाये गिरफ्तार किया जा सकता था। इसे बिना अपील, बिना दलील और बिना वकील का कानून कहा जाता था।

13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकाण्ड हुआ था। इसमें अमृतसर में जलियांवाला बाग में डॉ. सतपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ़्तारी के विरोध में हो रही जनसभा पर जनरल डायर द्वारा अंधाधुंध गोलियां चलवाई गयीं थी। इसमें लगभग 1000 व्यक्ति मारे गए थे।

सविनय अवज्ञा आंदोलन:- सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत गाँधी जी द्वारा दांडी यात्रा करके नमक के कानून को तोड़ने के साथ हुई। उस समय किसी भी व्यक्ति द्वारा नमक बनाना गैरकानूनी था।

12 मार्च, 1930 को गाँधी जी अपने 79 समर्थकों के साथ साबरमाती से दांडी तक 322 किमी. चलके 24 दिन बाद 6 अप्रैल, 1930 को पहुंचकर नमक के कानून को तोडकर सविनय अवज्ञा अन्दोलन की शुरुआत करते हैं।

पाकिस्तान की मांग:- 24 मार्च, 1940 को मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में मुहम्मद अली जिन्ना की अध्यक्षता में भारत से अलग एक मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान की मांग की गयी।

मुस्लिम लीग के दिल्ली अधिवेशन में खलीकुज्जमा द्वारा पाकिस्तान नाम से अलग राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।

भारत छोड़ो आंदोलन:- 1942 ई. को कांग्रेस द्वारा वर्धा में ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ प्रस्ताव को पारित किया गया जिसे 8 अगस्त, 1942 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा इसे स्वीकार किया गया। इसकी अध्यक्षता अबुल कलाम आजाद ने की थी।

9 अगस्त, 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई। इस आंदोलन में गाँधी जी ने ‘करो या मरो‘ का नारा दिया था। चूँकि द्वितीय विश्व युद्ध में कांग्रेस द्वारा अंग्रेजों के पक्ष में भारतीय सैनिकों के शामिल होने से मना कर दिया जाता है। इसीलिए गाँधी जी कहते हैं कि या तो हमें स्वतंत्र करो या फिर युद्ध में मरो।

आंदोलन शुरू होते ही प्रातः काल ही अंग्रेजों द्वारा ‘ऑपरेशन जीरो ऑवर‘ चलाकर गाँधी जी और कांग्रेस के अन्य महत्वपूर्ण नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। भारत छोड़ो आंदोलन को अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है।

आजाद हिन्द फ़ौज:- द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत में 21 अक्टूबर, 1943 को सुभाष चंद्र बोस द्वारा सोवियत संघ, जर्मनी और जापान की मदद से अंग्रेजों से लड़ने के लिए एक अस्थाई सेना बनाई थी जिसे आजाद हिन्द फ़ौज कहा गया। इसके लिए उन देशों की जेलों में कैद भारतीयों को छुड़ाकर इस सेना को बनाया गया।

8 नवंबर, 1943 को जापान ने अंडमान और निकोबार द्वीप सुभाष चंद्र बोस को सौंप दिए जिनका नाम क्रमशः ‘शहीद द्वीप‘ और ‘स्वराज द्वीप‘ रखा गया।

कैबिनेट मिशन- 1946

ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने 15 फरवरी, 1946 को भारतीय संविधान सभा की स्थापना और अन्य समस्याओं पर भारतियों से विचार-विमर्श के लिए कैबिनेट मिशन को भारत भेजने की घोषणा की। कैबिनेट मिशन 24 मार्च, 1946 को दिल्ली पहुंचा। इसके प्रमुख सदस्य थे- स्टेफोर्ड क्रिप्स, पैथिक लॉरेंस और ए. वी. अलेक्जेंडर। इसका नेतृत्व पैथिक लॉरेंस कर रहे थे।

कैबिनेट मिशन को मुस्लिम लीग ने 6 जून और कांग्रेस ने 25 जून को स्वीकार कर लिया। इसके बाद जुलाई 1946 में संविधान सभा के निर्माण के लिए चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस ने 214 सामान्य स्थानों में से 205 स्थान प्राप्त किये और मुस्लिम लीग ने 78 मुस्लिम स्थानों में से 73 स्थान प्राप्त किये।

मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त, 1946 को सीधी/प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस (Direct Action Day) मनाया। सबसे पहले इसे कलकत्ता में मनाया गया था। उस दिन कलकत्ता में मुस्लिमों द्वारा पाकिस्तान बनाने को लेकर दंगे किये गए थे।

माउंटबेटन योजना

3 जून, 1947 को भारत विभाजन की माउंटबेटन योजना प्रकाशित की गयी। कांग्रेस कार्यसमिति ने इसे 3 जून,1947 को स्वीकार कर लिया। 14 जून, 1947 को कांग्रेस महासमिति की बैठक में गोविन्द बल्लभ पंत द्वारा पेश किया गया।

गाँधी, नेहरू और सरदार पटेल के समर्थन के वाबजूद ये प्रस्ताव अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में सर्वसम्मति से पास न हो सका। इसके खिलाफ 161 सदस्यों ने वोट दिया था।

मुस्लिम लीग को इस योजना पर विचार करने के लिए 10 जून, 1947 को दिल्ली बुलाया गया। मुस्लिम लीग ने भारी बहुमत से इस योजना को स्वीकार किया। मुस्लिम लीग की बैठक में उपस्थित 400 सदस्यों में से सिर्फ 10 सदस्यों ने इसका विरोध किया था।

भारत की आज़ादी- 15 अगस्त

4 जुलाई, 1947 को ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वाधीनता विधेयक पेश किया गया। 15 जुलाई को बिना किसी संशोधन के हाउस ऑफ़ कॉमन्स द्वारा और 16 जुलाई को हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स द्वारा पास कर दिया गया। 18 जुलाई को उस पर ब्रिटिश सम्राट के हस्ताक्षर हो गए।

इसके अनुसार, 15 अगस्त, 1947 को देश को दो डोमिनियनों- भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) में बाँट दिया जायेगा। दोनों डोमिनियनों को पूरी स्वतंत्रता और सम्प्रभुता सौंप दी जाएगी। 14 अगस्त को पाकिस्तान अधिराज्य और 15 अगस्त को भारतीय अधिराज्य की स्थापना होगी।

15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद हुआ और भारत की आजादी के दिन (Independence Day of India) भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने संसद में पहला ऐतिहासिक भाषण दिया था. जिसे हम ‘ट्रिस्ट विद डेस्टनी‘ के नाम से जानते हैं।

Tryst with Destiny

इसके बाद 16 अगस्त, 1947 को जवाहर लाल नेहरू द्वारा लाल किले से तिरंगा झंडा फहराया गया था। तब से हर साल स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर भारत के प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराया जाता है और देश को सम्बोधित किया जाता है।

इस बार 15 अगस्त, 2020 को भारत का 74 वाँ स्वतंत्रता दिवस (74th Independence Day of India) मनाया जायेगा। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 वीं बार लाल किले से ध्वजारोहण (Flag Hoisting) करेंगे।

यह भी पढ़ें:- 15 अगस्त 2020 स्टेटस, कोट्स, बेस्ट विसेस

15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) कैसे मनाया जाता है?

जैसा कि हम जानते हैं कि 15 अगस्त के दिन हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हुआ था। इसी दिन को याद करने के लिए हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। ये हमारा राष्ट्रीय त्यौहार है। इस दिन हम उन स्वतंत्रता सेनानियों (Freedom Fighters) को याद करते हैं जिन्होंने आज़ादी के लिए अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी और शहीद हुए।

इस दिन देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर ध्वजारोहण करते हैं जिसके बाद राष्ट्र गान “जन-गण-मन” गाया जाता है और 21 गन सैल्यूट दिए जाते हैं। इसके एक दिन पहले राष्ट्रपति देश को सम्बोधित करते हैं। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, बैंक, सरकारी दफ्तरों और महत्वपूर्ण सार्वजानिक स्थानों पर ध्वजारोहण किया जाता है और मिठाई बांटी जाती है। शहीदों के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है भाषण दिए जाते हैं।

इस दिन मौसम खुशनुमा होता है इसलिए इस दिन लोगों द्वारा पतंगें भी उड़ाईं जाती हैं। इस दिन लोग देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत होते हैं, देशभक्ति के गीत हर जगह सुनाई देते हैं।

उम्मीद है आपको समझ आया होगा कि 15 अगस्त क्यों मनाया जाता है? / 15 August Swatantrata Diwas kyu manaya jata hai?

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